निशांत की कलम से फेसबुक , व्हाट्सअप जैसी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भले ही महिलाओ के हित में सहानभूति दिखाते हुए लाइक्स और कमेंट्स बटोरे जाते रहे हो लेकिन जमीनी हकीकत इससे एकदम उलट है!अपनी हक़ीक़त वाली जिंदगी में वापसी करते ही कुछ लोग आज भी महिलाओ को सिर्फ उपभोग की वस्तु समझते है और महिलाओ को सम्मान की दृष्टि से नही सिर्फ और सिर्फ अपनी हवस और काम वासना को शान्ति के लिएउपयोगी समझते है!
और दुःखद पहलु ये है की ऐसी नीच मानसिकता वाले लोग हमारे अगल बगल में ही मौजूद होते है ऐसे लोग पहले अपनेपन का ढोंग रचते है और फिर भूखे भेड़िये को तरह हमारे किसी अपने का शिकार करते है!
और सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात ये है की पुलिस सब कुछ जानते समझते हुए भी कार्यवाही करने से बचती है और जिसका नतीजा हवस का शिकार उस लड़की को भुगतना पड़ता है जिसे समय पर इन्साफ ना मिल पाने की वजह से पड़ोस के ताने सुननेके साथ साथ पूरी जिंदगी घुट घुट कर जीने को मजबूरहोना पड़ता है!अभी ऐसी ही एक हैवानियत का शिकार बच्ची का ताजा मामला नई दिल्ली के विकास नगर का है जहाँ मात्र 14 साल की एक मासूम को बहला फुसला कर विकास नगर में ही रहने वाले “अंकित शाह ” नाम के दरिंदे ने 3 महीने पहले रेप किया और घर बताने पर लड़की को औरउसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी, धमकी से डरकर पहले तो लड़की ने अपना मुँह नही खोला पर लड़कीकी तबियत बिगड़ने के बाद घर वालो ने जब लड़की से पूछताछ की तो उसने सब सच्चाई से परिवार को रूबरू करा दिया!
मामले का पता लगने पर जब लड़की के घर वाले आरोपी लड़के के घर पहुँचे तो उसने उनके साथ मारपीट की और उन्हें जान से मारने की धमकी देने के साथ साथ मामले को रफा दफा करने की नसीहत भी दी! और इसे बेहद दुखद ही कहा जाएगा की जब पीड़ित परिवार पुलिस के पास पंहुचा तो पर्याप्त सबूत नाहोने की बात करते हुए पुलिस ने उनको थाने से निकाल दिया और थक हारकर जब लड़की के भाई ने दिल्लीके कमिश्नर “अमूल्य पटनायक ” से फ़ोन पर सम्पर्क साधने की कोशिश की तो “हर व्यक्त जनता के साथ “का दावा करने वाले कमिश्नर ने उनके फ़ोन तक का जवाब नही दियाअब ना तो पुलिस साथ है और ना कमिश्नर तो ऐसे में आरोपी को सजा कैसे दिलाई जाए??दिल्ली पुलिस की संवेदनशीलता का परिणाम ये है कीदिल्ली में ऐसे मामलो की भरमार है इसके बावजूद दिल्ली पुलिस का बर्ताव भी घोर दुखद है!

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